Tuesday, 12 April 2016

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How to get interest in study.......

कैसे लगे पढाई में मन
प्रतिदिन लगन के साथ पढाई करना सरल कार्य नही है
निरंतरता इच्छाओं का बलिदान मांगती है । यदि हम
कोई लक्ष्य अपने जीवन में तै कर लें तो फिर उस हेतु
पूर्ण समर्पण अति आवश्यक होता है अन्यथा आधे
मन से किया गया कार्य सफलता की ओर नही ले
जा सकता अतः हमें अपनी मानसिक स्थिति पर निगाह
रखनी चाहिए कि वो निर्धारित लक्ष्य की ओर समर्पित है
की नही। यदि मन अध्ययन की तरफ पूर्णतः समर्पित
होकर झुक नही रहा है तो इसे खतरनाक संकेत के
रूप में ग्रहण किया जाना चाहिए और इसके
समाधान हेतु कदम उठाए जाने चाहिए। पढाई
में मन कैसे लगे इस हेतु कुछ उपाए किये जा
सकते हैं--
1. आदत को निर्मित करने का प्रयास करना
चाहिए क्योकि आदत के बन जाने से
मानसिक इच्छाओं पर से निर्भरता समाप्त
हो जाती है।
2. यदि व्यक्तित्व भाव प्रधान हो तो नकारात्मक
भावों पर सख्त निगाह रखनी चाहिए क्योकिं भावों
की अधिकता से मन चंचल बना रहता है। मन
की चंचलता से अध्ययन में बाधा आती है। जैसे ही
हम पढ़ना प्रारम्भ करते हैं मन में दूसरे विचार आने
लगते हैं। मन की चंचलता को रोकने के लिए अपने
सामाजिक संबंधों को नियमित कर लेना चाहिए।
अधिक लोगों से मिलना जुलना नही चाहिए। केवल
ज्ञानी और अनुभवी लोगों से मिलना चाहिए। कम
संपर्क से हमारा दिमाग दूसरे लोगों के विचारों से
खाली रहेगा और पढ़ने में व्यवधान नही आएगा।
3. मन को नियंत्रित करने के लिए थोड़ा कठोर उपाए
अपनाने चाहिए। ज़बरदस्ती पढ़ना चाहिए कुछ
देर के अध्ययन के बाद जब रुचि पैदा हो जाएगी
तो फिर अपने आप मन लगने लगेगा।
4. अधिक चीज़ों को पढ़ने का प्रयास नही करना
चाहिये। दो तीन दिन तक एक ही विषय पढ़ा
जा सकता है ताकि उसमे जल्दी पारंगत हुआ
जा सके। यदि हम अधिक विषयों को पढ़ने का
मन बनाएंगे तो फिर वह विचार मन में बोझ पैदा
कर सकता है।
5. पढाई में मन लगे इस हेतु अपने कार्य में सुंदरता
पैदा करनी चाहिए। ध्यान रहे सुंदरता गति प्रदान
करती है।अपने कार्यों को इस प्रकार से करें की
मन उससे प्रसन्न रहे। अंतिम चयन में जो चीज़
सर्वाधिक महत्वपूर्ण हो उसमें कुशलता प्राप्त करें
जैसे प्रारंभिक परीक्षा से अधिक मुख्य परीक्षा की
तैयारी करें।इससे एक संतुष्टि रहेगी और मन
पढाई में लगेगा।
6. अपनी कमज़ोरियों को दूर करने के लिए सबसे
अधिक कोशिश करनी चाहिए। ये कमज़ोरियाँ
तनाव पैदा करती हैं और फिर कार्य में उत्साह नही
रह पाता।
7. अपने को मन के भावों के हिसाब से नही चलाना
चाहिये बल्कि जब मन न करे पढ़ने का तब सख्ती
के साथ उठना चाहिए और गहराई के साथ पढ़ना
शुरू कर देना चाहिए इस हालत में शब्दों के अर्थों
पर गौर करते हुए पढ़ना चाहिये कुछ ही देर में जब
समझ में बात आने लगेगी तो ख़ुशी के भाव पैदा
होंगे और पढाई में मन लगने लगेगा।
8. सफलता को खुद से दूर नही समझना चाहिये
अच्छे ढंग से यदि कार्य किया जाएगा तो अपने
आप सफलता मिल जाएगी।
9. निर्माण का कार्य सदैव मेहनत और समय मांगता है
विध्वंस में समय नही लगता अतः बस किसी तरह
कैसे भी सफलता मिल जाए--यह विचार उचित
नही अपने कार्यों को अच्छे ढंग से करते रहेंगे तो एक
दिन अपने आप सफलता मिल जाएगी।
10. जीवन में उस लक्ष्य को चुनना चाहिए जिस तरफ
रुचि हो लोगों की देखा देखी नही करनी चाहिए।
11. केवल सरकारी नौकरी को ही अपना लक्ष्य नही
बनाना चाहिए। दूसरे क्षेत्रों के सम्बन्ध में
ग़लत धारणाएँ नही बनानी चाहिए। हर क्षेत्र में
नाकामी और सफलता होती है। ऊँची नीची लहरे
चलती रहती हैं। ईमानदारी और कर्मठता हो तो
फिर सारी चीज़ें आसान हो जाती हैं। ये नही
सोंचना चाहिए की मैंने इतने सालों तक पढाई की
है अब अपना निजी व्यवसाय स्थापित करने में
समय लगेगा। दुनिया में हर तरह के लोग हुए हैं
और हर प्रकार के कार्य भी हुए हैं बस अच्छे
व्यवहार के साथ कार्य करना चाहिए ..

By:; Shubham mishra

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