Friday, 30 September 2016

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CHSL vacancy notification will be out on 8 October 2016

Hello dear,
A long and most awaited Exam of SSC : Combined Higher Secondary Leverl Exam Notification, is going to out on 8 October, Do you preparation well and grab your job.


Short Notice-CHSL 2016

For official notice click below button:

Here is notice in textual Form

 It is for information of all aspirant candidates that the detailed Notice of Combined Higher Secondary Level (10+2) Examination, 2016 will be uploaded on the website of the Commission (www.ssc.nic.in) and its Regional Offices on 8 th October, 2016. 





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Thursday, 29 September 2016

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BOB Manipal 2016: Memory Based Paper - English Language

Dear Philic's,

Recently was BOB Manipal exam and now its time for it's Memory Based Paper. 


With many other exams ahead weather it's IBPS or BOM, practicing is the need of hour. With Memory Based Paper you can know the level of questions and their pattern.

After the exam analysis many students are eagerly waiting for Memory Based Question Paper and as we promised here we provide you The Memory Based Question Paper of BOB Manipal 2016.




Courtesy : BankersAdda

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Download Rakesh Yadav Classroom Assignment Free

Hello dear,
Rakesh Yadav Classromm Assignment Download Free


In the series of sharing ebooks, we are sharing a very good and demanding ebook by Rakesh Yadav sir, it will definitely help you to score well in your upcoming examination.


Click Me to Download. 
size: 15 MB


SS Bharti Sir Maths Notes Advanced(Part 2) Download Free


Also download Free

Disclaimer: We are Sharing only the link of this ebook available in the blog, if you are authority and think it should not be here, you can Mail us for removal of this ebook to 
:-  KnowledgePhilic@gmail,com





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Syndicate Bank IBPS CWE PO/MT-V Joining Formalities Out

Dear Philic's,
Syndicate Bank:-IBPS CWE PO/MT-V Joining Formalities

Good news, Syndicate Bank has published the the joining formalities of Probationary Assistant Manager in JMGS-I under

CWE-PO/MT-V-2016. The list of selected candidates is given below:


Click Here To Download the Selected Candidates



Must Read



Thanks.


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Wednesday, 28 September 2016

Trick to Remember Currency of different Countries

Trick : BIG FAN of PI and wished through SMS 
Trick to Remember of Currency of different Countries

(BIG -FAN -PI -SMS)

  Euro Currency

**B-I-G**
B-Belgium
I-Ireland
G-Germany

**F-A-N**

F-France
A-Austria
N-Netherland

**P-I**

P-Portugal
I-Italy

**S-M-S**

S-Spain
M-Malta
S-Solvania


 कौन-कौन-सी देश की मुद्रा डॉलर हैं:-

Trick-सीता जी वन से कहाँ आए

🍭सी:-सिंगापूर
🍭ता:-ताइवान
🍭जी:-जिम्बाबे
🍭व:-वरमुडा
🍭न:-न्यूजीलैंड
🍭स:-सेंटलुइश्
🍭क:-कनाडा
🍭हाँ:-हांगकांग
🍭आ:-ऑस्ट्रेलिया
🍭ए:-अमेरिका



रुपया कहाँ-2 की मुद्रा हैं:-

Trick:-भारत से मामा श्री ने पाई रुपया

🍭भारत:-भारत
🍭स:-शेशेल्स
🍭मा:-मालदीव
🍭मा:-मॉरीशस
🍭शरी:-श्रीलंका
🍭न:-नेपाल
🍭पा:-पाकिस्तान
🍭ई:-इंडोनेशिया
.......रुपया...........


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Monday, 26 September 2016

Sushma Swaraj's speech at UNGA: Full text 26 September 2016 {Lang- Hindi + English}

Image result for Sushma Swaraj

#विदेश_मंत्री_श्रीमती_सुषमा_स्‍वराज

का 71 वीं संयुक्‍त राष्ट्र आम सभा में भाषण, न्‍यूयॉर्क, 26 सितम्‍ब 2016
माननीय अध्‍यक्ष जी,
सबसे पहले मैं अपने देश की ओर से और स्वयं अपनी ओर से संयुक्त राष्ट्र महासभा के 71वें अधिवेशन के अध्यक्ष निर्वाचित किए जाने पर आपको हार्दिक बधाई देती हूं। यह संगठन जो इतिहास का सबसे बड़ा शांति आंदोलन है, उसके महासचिव, श्री बान की-मून जी को भी उनकी संयुक्‍त राष्ट्र को दी गई सेवाओं के लिए धन्‍यवाद देती हूं।
अध्यक्ष जी,
2. एक वर्ष पहले मैंने इसी पवित्र मंच से अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सदस्यों को संबोधित किया था। तब से लेकर आज तक विश्व में बहुत परिवर्तन हुआ है - कुछ अच्छा, कुछ बुरा और कुछ हम सबको बहुत चिंतित करने वाला। पिछले वर्ष के दौरान किए गए कार्यों और उपलब्धियों पर विचार विमर्श करने के लिए इससे बेहतर कोई और मंच नहीं हो सकता। हम सभी को ये याद रखना होगा कि जो काम हमने किए हैं, उनकी तो समीक्षा होगी ही, लेकिन जो नहीं कर पाए हैं, उनकी भी समीक्षा होगी। अध्यक्ष जी,
3. इस गरिमामय महासभा में अनेक मुद्दों पर चर्चा हुई है, जैसे - एएमआर के लिए नए टीकों को साझा करना, सस्ती दवाईयों की उपलब्धता को सुनिश्चित करना, प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को कम करने के लिए सैन्‍डई ढ़ांचे को लागू करना, मानव संसाधनों का मुक्त एवं सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना, और UN Peace Keeping Forces में सैनिक भेजने वाले देशों के साथ विचार-विमर्श करना। समय के अभाव के कारण मैं सभी मुद्दों को तो नहीं छू सकूंगी, लेकिन कुछ ऐसे मुद्दों का उल्लेख जरूर करना चाहूंगी जो अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय के लिए अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण हैं।
4. आज हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है विश्‍व के कई कोनों में फैली हुई गरीबी को मिटाना, और यह सुनिश्चित करना कि हम उन सभी जरूरतमंद लोगों तक समृद्धि पहुंचा सकें। हमें यह भी सुनिश्चित करना है कि स्त्रियों और पुरूषों के बीच लैंगिक समानता हो और महिलाओं को सुरक्षा मिल सके। हमें विश्‍व शांति के लिए कार्य करना है क्‍योंकि‍ शांति के बिना समृद्धि नहीं आ सकती।
अध्‍यक्ष जी,
5. आप अभिनंदन के पात्र हैं क्‍योंकि इन्‍हीं चुनौतियों के महत्‍व को समझते हुए आपने इस महासभा के लिए SDGs को सबसे उच्‍च प्राथमिकता दी है। मुझे खुशी है आपको ये बताते हुए कि इन 17 में से अधिकतर लक्ष्यों को भारत सरकार ने अपने राष्ट्रीय कार्यक्रमों में शामिल कर लिया है। स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत विद्यालयों में 4 लाख से ऊपर शौचालयों का निर्माण हो चुका है। इसी तरह ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, एक देशव्‍यापी अभियान बन गया है। मेक इन इंडिया का आह्वान हो रहा है। जन-धन योजना जो विश्‍व की सबसे बड़ी वित्‍तीय समावेशी योजना है, उसके अंतर्गत 25 करोड़ से ज्‍यादा गरीब लोगों के बैंक खाते खोले गए हैं। डिजिटल इंडिया बहुत तेजी से अपने पैर पसार रहा है। भारतीय युवाओं को कौशल युक्त बनाने के लिए अनेकानेक प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहे हैं, जिनसे हमारे युवा अपनी क्षमताओं का समुचित विकास कर सकेंगे। इन पहलों से भारत की विकास यात्रा में नए आयाम जुड़ सके हैं और आज आर्थिक मंदी के दौर में भी भारत विश्‍व की बड़ी अर्थव्‍यवस्‍थाओं में सबसे तेजी से विकास करने वाली अर्थव्‍यवस्‍था बन गया है।
अध्‍यक्ष जी,
6. हम सब जानते हैं कि मानवता का 1/6 हिस्सा भारत में रहता है। इसलिए यदि भारत में SDG सफल होगा तभी विश्व में सफल हो सकेगा। हम एजेंडा 2030 को पूरे मनोयोग से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमने तय किया है कि‍ संसद के हर सत्र में एक दिन केवल SDGs पर चर्चा किया करेंगे ताकि इनकी प्रगति पर सतत् निगरानी बनी रहे। इससे बहुत अच्‍छे परिणाम सामने आएंगे।
7. एजेंडा 2030 को सफल बनाने के लिए सभी देश अपनी-अपनी सामर्थ्‍य के अनुसार तो कार्य कर ही रहे हैं परंतु यह भी जरूरी है कि उन्‍हें अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग भी मिलता रहे। knowledgePhilic
अध्यक्ष जी,
8. जलवायु परिवर्तन एक और ऐसा मुद्दा है, जो हमारे सामने एक गंभीर चुनौती बनकर खड़ा है। प्रकृति के पास संपदा तो अपार है लेकिन उतनी, जितनी वो मनुष्य की जरूरत को पूरा कर सके, पर इतनी नहीं कि उसके लालच का पेट भर सके। क्योंकि लोभ की कोई सीमा नहीं होती। इसीलिए प्रधानमंत्री मोदी जी ने एक नया सिद्धांत दिया है Climate Justice यानि जलवायु न्याय। हम प्रकृति के साथ न्याय करें तो वो हमारे और हमारी भावी पीढ़ियों के साथ जरूर न्याय करेगी। लेकिन यदि हम उसका अंधाधुंध दोहन करेंगे तो वो क्रोधित हो जाएगी और अपना रौद्र रूप दिखाएगी। हम देख ही रहे हैं कि दुनिया में कई जगहों पर प्रकृति अप्राकृतिक हो बैठी है - किसी कोने में भयंकर वर्षा, कहीं घनघोर गर्मी, कहीं झंझावात, कहीं सुनामी, कहीं बादलोंका फटना।
9. ये समय का तकाजा है हम असीमित खपत पर रोक लगाएं और अपनी जीवन-शैली को पर्यावरण के अनुकूल बनाएं। योग भारत का वो प्राचीन ज्ञान है, जो एक टिकाऊ जीवन शैली का प्रतीक है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के लिए दिए गए अपार समर्थन के लिए मैं आप सबका आभार व्यक्त करना चाहती हूं।
10. पेरिस समझौते में ‘’Common but Differentiated Responsibilities and Respective Capabilities’’ के सिद्धांत को स्वीकारा गया है, जिसका अर्थ है कि जिम्मेदारी तो सबकी साझी है, लेकिन देनदारी सबकी अलग-अलग। इसलिए ये बेहद जरूरी है कि विकसित देश अपनी जिम्‍मेदारियों का निवर्हन करते हुए सभी की भलाई के लिए तकनीक भी दें और धनराशि भी, तभी यह कार्यक्रम सफल होगा।
11. हमने अपने देश में बहुत महत्वाकांक्षी योजना बनाई है, जिसमें हमने वर्ष 2030 तक 40 प्रतिशत ऊर्जा Non Fossil Fuel से बनाने का लक्ष्‍य रखा है। इसके लिए हमें एक निश्चित वातावरण की आवश्यकता होगी, क्योंकि बाहर से पूंजी निवेश करने वाले लोग नीतियों की स्थिरता चाहते हैं। ये निश्चितता उन्हें मिले, इस प्रयास में हम लगे हैं। इसके अलावा International Solar Alliance का गठन भी हमारी एक अभिनव पहल है जिससे सौर तकनीक सभी को उपलब्‍ध हो सके।
12. मैं इस मंच से यह विश्वास दिलाती हूं कि जलवायु परिवर्तन की दिशा में भारत एक अग्रणी भूमिका निभाएगा। पेरिस समझौते के लिए भारत अपना Instrument of Ratification 2 अक्‍टूबर को जमा करा देगा। हमने सोच समझकर यह तिथि तय की है क्‍योंकि यह गांधी जी का जन्‍म दिवस है जिनका संपूर्ण जीवन प्रकृति के संरक्षण को समर्पित रहा।
अध्यक्ष जी,
13. अब मैं एक ऐसे विषय पर बोलने जा रही हूं, जिस पर इस सभा में बैठा हर व्यक्ति चिंतित है और चिंतित ही नहीं सोचने पर मजबूर है। इसी महीने इस शहर में हुए 9/11 आतंकी हमले की 15वीं वर्षगांठ थी। पिछले 15 दिनों में इसी शहर में एक और आतंकी हमले में मासूमों को मारने की कोशिश की गई थी। हम इस शहर का दर्द समझते हैं, हम पर भी उरी में इन्‍हीं आतंकी ताकतों ने हमला किया था। विश्‍व इस अभिशाप से बहुत समय से जूझ रहा है। लेकिन, आतंकवाद का शिकार हुए मासूमों के खून और आसुओं के बावजूद, इस वर्ष काबुल, ढाका, इस्तांबुल, मोगादिशू, ब्रसेल्स, बैंकॉक, पेरिस, पठानकोट और उरी में हुए आतंकवादी हमले और सीरिया और इराक में रोजमर्रा की बर्बर त्रासदियां हमें ये याद दिलाती हैं कि हम इसे रोकने में सफल नहीं हुए हैं।
14. सबसे पहले तो हम सबको ये स्वीकारना होगा कि आतंकवाद मानवाधिकारों का सबसे बड़ा उल्लंघन है, क्योंकि वो निर्दोष लोगों को निशाना बनाता है, बेगुनाहों को मारता है, वो किसी व्यक्ति या देश का ही नहीं मानवता का अपराधी है। उसके बाद देखना होगा कि इन आतंकवादियों को पनाह देने वाले कौन-कौन हैं? आतंकवादियों का ना तो कोई अपना बैंक है, ना हथियारों की फैक्ट्रियां, तो कहां से उन्हें धन मिलता है, कौन इन्हें हथियार देता है, कौन इन्हें सहारा देता है, कौन इन्हें संरक्षण देता है? ऐसे ही सवाल इसी मंच से अफगानिस्‍तान ने भी कुछ दिन पहले उठाए थे।
अध्यक्ष जी,
15. इतिहास गवाह है कि जिन्‍होंने अतिवादी विचारधारा के बीज बोए हैं उन्‍हें ही उसका कड़वा फल मिला है। आज उस आतंकवाद ने एक राक्षस का रूप धारण कर लिया है, जिसके अनगिनत हाथ हैं, अनगिनत पांव और अनगिनत दिमाग और साथ में अति आधुनिक तकनीक। इसलिए अब अपना या पराया, मेरा या दूसरे का, आतंकवादी कहकर हम इस जंग को नहीं जीत पाएंगे। पता नहीं यह दैत्य किस समय किस तरफ का रुख कर ले।
16. इसीलिए यदि हमें आतंकवाद को जड़ से उखाड़ना है तो एक ही तरीका है- हम अपने मतभेद भुलाकर आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हों, उसका मुकाबला दृढ़ संकल्‍प से करें और हमारे प्रयासों में तेजी लाएं। हम पुराने समीकरण तोड़ें, अपनी पसंदगियां-नापसंदगियां एक तरफ रखें, मोह त्यागें, अहसानों को भूलें और एक दृढ़ निश्चय के साथ इकट्ठा होकर इस आतंकवाद का सामना करने की रणनीति बनाएं। ये मुश्किल काम नहीं है अध्यक्ष महोदय, केवल इच्छाशक्ति की कमी है। ये काम हो सकता है और ये काम हमें करना है, नहीं करेंगे तो हमारी आने वाली संततियां हमें माफ नहीं करेंगी। हां, यदि कोई देश इस तरह की रणनीति में शामिल नहीं होना चाहता तो फिर उसे अलग-थलग कर दें।
17. दुनिया में ऐसे देश हैं जो बोते भी हैं तो आतंकवाद, उगाते भी हैं तो आतंकवाद, बेचते हैं तो भी आतंकवाद और निर्यात भी करते हैं तो आतंकवाद। आतंकवादियों को पालना उनका शौक बन गया है। ऐसे शौकीन देशों की पहचान करके उनकी जबावदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। हमें उन देशों को भी चिन्हित करना चाहिए जहां संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी सरेआम जलसे कर रहे हैं, प्रदर्शन निकालते हैं, जहर उगलते हैं और उनके ऊपर कोई कार्यवाही नहीं होती। इसके लिए उन आतंकवादियों के साथ वे देश भी दोषी हैं जो उन्हें ऐसा करने देते हैं। ऐसे देशों की विश्‍व समुदाय में कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
अध्यक्ष जी,
18. 21 तारीख को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने इसी मंच से मेरे देश में मानवाधिकार उल्लंघन के निराधार आरोप लगाए थे। मैं केवल यह कहना चाहूंगी कि‍ दूसरों पर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाने वाले जरा अपने घर में झांककर देख लें कि बलूचिस्तान में क्या हो रहा है और वो खुद वहां क्या कर रहे हैं। बलूचियों पर होने वाले अत्याचार यातना की पराकाष्ठा है।
19. दूसरी बात, पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री ने कही कि बातचीत के लिए जो शर्त भारत लगा रहा है, वो हमें मंजूर नहीं है। कौन सी शर्तें? क्‍या हमने कोई शर्त रखकर न्‍यौता दिया था शपथ ग्रहण समारोह में आने का? जब मैं इस्‍लामाबाद गई थी, Heart of Asia Conference के लिए, तो क्‍या हमने कोई शर्त रखकर Comprehensive Dialogue शुरू किया गया था? जब प्रधानमंत्री मोदी काबुल से चलकर लाहौर पहुंचे थे तो क्‍या किसी शर्त के साथ गए थे? किस शर्त की बात हो रही है? अध्‍यक्ष जी, हमने शर्तों के आधार पर नहीं बल्कि मित्रता के आधार पर सभी आपसी विवादों को सुलझाने की पहल की और दो साल तक मित्रता का वो पैमाना खड़ा किया जो आज से पहले कभी नहीं हुआ। ईद की मुबारकबाद, क्रिकेट की शुभकामनाएं, स्‍वास्‍थ्‍य की कुशलक्षेम – क्‍या ये सब शर्तों के साथ होता था?
20. लेकिन इस मित्रता के बदले में हमें मिला क्या – पठानकोट, बहादुर अली और उरी। बहादुर अली तो जिंदा आतंकवादी हमारे कब्जे में है, जो पाकिस्‍तान से भारत में किए जा रहे सीमा पार आतंकवाद का जीता जागता सबूत है। लेकिन पाकिस्‍तान को जब इन घटनाओं के बारे में बताया जाता है, तो वो तुरंत इंकार करके पल्ला झाड़ लेता है। वह शायद सोचता है कि ज्यादा से ज्यादा आतंकी घटनाओं से भारत की भूमि हथियाने के उसके इरादे पूरे हो जाएंगे। मैं भी पूरी दृढ़ता और विश्वास के साथ कहना चाहूंगी कि पाकिस्‍तान यह सपना देखना छोड़ दे, जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेगा।
अध्यक्ष जी, knowledgePhilic.com
21. मैंने प्रारंभ में ही कहा था कि जो कार्य हमने किए हैं, उन्हें तो हम गिनें ही, मगर जो नहीं कर पाए, उनको गिनना भी जरूरी है। इस सभा के लिए ऐसे दो काम गिनवाना चाहती हूं।
22. CCIT (Comprehensive Convention on International Terrorism) सन् 1996 से भारत द्वारा ये प्रस्ताव दिया हुआ है। बीस साल गुजर गए मगर आज 2016 में भी हम CCIT को निष्‍कर्ष तक नहीं पहुंचा सके। इसी कारण हम कोई ऐसा अंतर्राष्ट्रीय मानक नहीं बना सके, जिसके अंतर्गत आतंकवादियों को सजा दी जा सके या उनका प्रत्‍यर्पण हो सके। इसीलिए आप सबसे मेरा अनुरोध है कि ये सभा पूरे दृढ़ निश्चय के साथ जल्‍द CCIT को पारित करे।
23. जिस प्रकार आतंकवाद से लड़ने के लिए हमें एक समकालीन नीति चाहिए उसी प्रकार हमें एक ऐसी संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद भी चाहिए जो आज के वैश्विक परिदृश्‍य के अनुकूल हो। अधिकांश देशों का मानना है कि संयुक्‍त राष्‍ट्र 1945 की वैश्विक वैश्विक परिस्थिति के अनुरूप सिर्फ कुछ ही देशों के हितों की रक्षा न करे। चाहे वह किसी संस्‍था की बात हो या मुद्दों की, हमें आज की वास्‍तविकता और चुनौतियों के अनुसार काम करना होगा। आज सुरक्षा परिषद की स्‍थाई और अस्‍थाई दोनों सीटों में विस्‍तार की आवश्‍यकता है जिससे सुरक्षा परिषद समकालीन बन सके। मेरा अनुरोध है कि इस आम सभा की इच्‍छानुसार Inter Governmental Negotiations (IGN) प्रक्रिया के तहत Text Based Negotiation जल्‍दी प्रारंभ किए जाएं।
24. यदि ये दोनों चिरप्रतीक्षित कार्य आपके इस कार्यकाल में हो जाते है तो मैं कह सकती हूं कि संयुक्‍त राष्‍ट्र सभा का 71वां अधिवेशन बहुत ही सार्थक होगा।
अध्‍यक्ष जी,
25. 21वीं सदी पर शुरूआत से ही अशां‍ति‍ और हिंसा का साया रहा है। परंतु मिल-जुलकर प्रयास करने से हम इसे मानव सभ्‍यता के इतिहास में एक स्वर्णिम युग में बदल सकते हैं। लेकिन भविष्‍य में क्‍या होगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम आज क्‍या करते हैं।
धन्यवाद।

Here is full text in English
Hon'ble President,

1. On behalf of India and on my own behalf, I congratulate you on your election as President of the 71st United Nations General Assembly. Let me also take this opportunity to thank Secretary General Ban Ki Moon for his services to the United Nations, history's largest peace movement.

Mr. President,

2. A year has passed since I stood here at this hallowed podium to address the members of the international community. Since then, much has changed in the world around us - some for the better, some for the worse and much which has been cause of great concern. There can be no better platform to ponder our actions and our achievements over the last year. We must remember that we will be defined not just by our actions, but equally, by our inaction.

Mr. President,

3. A number of issues have been debated in this august Assembly - from the necessity of global partnerships in sharing new vaccines and promoting access to affordable drugs to counter anti-microbial resistance, to the need for faster implementation of the Sendai Framework to mitigate the risk of natural disasters. From the challenge of ensuring well-ordered mobility of productive human resources, to the necessity of adequate consultations with Troop Contributing Countries before framing mandates for UN Peacekeeping Operations. But my time is limited. I would therefore, focus only on some of the most pressing issues facing the international community.

Mr. President,

4. The true challenge of our time is to end the curse of harsh poverty that still lurks in so many corners of our world; to ensure that the fruits of growing prosperity reach those who need it most; to take forward the mission of gender equality and protect women where there is gender regression; and to ensure peace across boundaries, not least because there can be no prosperity without peace.

5. I congratulate you for the priority you have given to the Sustainable Development Goals (SDGs) by making them the theme for the 71st UNGA. I am happy that the 17 goals adopted by this Assembly are matched by the development vision of my Government, which is geared towards the achievement of these same objectives. Under the Swachh Bharat Mission (Clean India Campaign), more than 400,000 toilets have been constructed in schools. The Beti Bachao Beti Padhao (Educate the Girl Child, Save the Girl Child) programme has become a nation-wide mission. The Make in India brand is receiving international acclaim. Almost 250 million bank accounts have been opened for the poor under the Jan Dhan Yojana, the largest financial inclusion programme the world has ever seen. Digital India is transforming the country. Under the Skill India initiative, a number of programmes are underway to enable youth to reap the demographic dividend. These initiatives have added a new dimension to India's growth story, making it the fastest growing major economy in the world at a time of slow global growth.

Mr. President,

6. We are all aware that 1/6th of humanity lives in India. Therefore global success in realizing SDGs depends on the success achieved in India. We are committed to the wholehearted implementation of the Agenda 2030 as a national effort. We have decided to dedicate one day in each session of our Parliament for discussions only on SDGs. This will enable us to constantly monitor their progress and this will give us good results.

7. However, in a globalised world, national effort needs to be supplemented by international cooperation for the successful implementation of Agenda 2030.

Mr. President,

8. Climate change is yet another serious challenge confronting us. There are enough resources on this planet to fulfil everyone's needs, but not enough to fulfil anyone's greed, for greed is limitless. In this context PM Modi has championed a new concept - Climate Justice. If we respect nature, nature will respect and nurture us and future generations. But, if we exploit nature mindlessly, then we must be mindful that nature will unleash its fury upon us. In different parts of the world, we have already seen nature drift towards the unnatural - from torrential rain to excessive heat, from tsunamis to storms and cloudbursts.

9. We must curb reckless consumption, and adopt lifestyles in harmony with nature. Yoga, the storehouse of India's ancient wisdom, epitomises a sustainable lifestyle. Let me record our gratitude for the unprecedented global response to the International Day of Yoga.

10. In the Paris Agreement, the principle of 'Common but Differentiated Responsibilities' and 'Respective Capabilities' has been acknowledged and accepted. This makes clear that while our responsibility is common, obligations are different. Developed nations must discharge their responsibility in the search for the common good, with finance and technology transfer.

11. India has launched an ambitious domestic effort to transform our energy mix to achieve 40% energy from non-fossil fuel sources by 2030. The massive investments required entail a predictable and stable environment towards which we are working actively. Apart from this, our path-breaking initiative for an International Solar Alliance is intended to make efficient solar technology available for all.

12. I assure this Assembly that India will continue to play a leading role in combating climate change. We have decided to submit our Instrument of Ratification of the Paris Agreement on October 2, the birth anniversary of Mahatma Gandhi who epitomised a lifestyle with the smallest carbon footprint.

Mr. President,

13. Let me now turn to a subject of the most critical importance, one which deeply concerns every member of this Assembly. This month we marked the 15th Anniversary of the 9/11 terror attacks on this city. Tragically, less than 15 days ago, another attempt at killing innocents was made through an act of terror in this same city. We, who have suffered in Uri recently, understand the pain inflicted by the same forces. The world has been battling this scourge for long. However, despite the blood and tears of innocent victims, attacks this year alone in Kabul and Dhaka, Istanbul and Mogadishu, Brussels and Bangkok, Paris, Pathankot and Uri as well as daily barbaric tragedies in Syria and Iraq, remind us that these malevolent forces are yet to be defeated.

14. We must acknowledge that terrorism is undoubtedly the biggest violation of human rights. It targets the innocent and kills indiscriminately. Terrorism has gone way beyond affecting individuals or nations - it is a crime against humanity itself. But it is important to ask - who is behind this and who benefits from it? Terrorists do not own banks or weapons factories, so let us ask the real question: who finances these terrorists, who arms them and provides sanctuaries? We heard similar questions being asked by Afghanistan from this podium.

Mr. President,

15. History proves that those who seed extremist ideologies, reap a bitter harvest. The germ of evil has grown into a hydra-headed monster, backed by technological sophistication that threatens the peace and harmony of our world. We will not be able to win against terrorism by making specious distinctions between your problems and mine, between terrorists who attack you and those who attack me. For we do not know who this Frankenstein's monster will devour next.

16. Therefore if we want to defeat terrorism, there is only one way - that we unite across our differences, add steel to our resolve and inject urgency in our response. We need to forget our prejudices and join hands together to script an effective strategy against terror. This is not an impossible task provided we have the will. We can do it, we must do it. Otherwise our future generations will forever hold us to account. And if any nation refuses to join this global strategy, then we must isolate it.

17. In our midst, there are nations that still speak the language of terrorism, that nurture it, peddle it, and export it. To shelter terrorists has become their calling card. We must identify these nations and hold them to account. These nations, in which UN designated terrorists roam freely, lead processions and deliver their poisonous sermons of hate with impunity, are as culpable as the very terrorists they harbour. Such countries should have no place in the comity of nations.

Mr. President,

18. On 21st September, the Prime Minister of Pakistan used this podium to make baseless allegations about human rights violations in my country. I can only say that those accusing others of human rights violations would do well to introspect and see what egregious abuses they are perpetrating in their own country, including in Balochistan. The brutality against the Baloch people represents the worst form of State oppression.

Mr. President,

19. The Prime Minister of Pakistan also said that India has placed pre-conditions for talks which are not acceptable to him. What pre-conditions? Did we impose any pre-condition before extending an invitation for the oath-taking ceremony of our Government? Did we impose any pre-condition when I went to Islamabad for the Heart of Asia conference and agreed to begin the Comprehensive Bilateral Dialogue? Did we impose any pre-condition when Prime Minister Modi travelled from Kabul to Lahore? What pre-conditions? We took the initiative to resolve issues not on the basis of conditions, but on the basis of friendship! We have in fact attempted a paradigm of friendship in the last two years which is without precedent. We conveyed Eid greetings to the Prime Minister of Pakistan, wished success to his cricket team, extended good wishes for his health and well being. Did all this come with pre-conditions attached?

20. And what did we get in return? Pathankot, Bahadur Ali, and Uri. Bahadur Ali is a terrorist in our custody, whose confession is a living proof of Pakistan's complicity in cross-border terror. But when confronted with such evidence, Pakistan remains in denial. It persists in the belief that such attacks will enable it to obtain the territory it covets. My firm advice to Pakistan is: abandon this dream. Let me state unequivocally that Jammu and Kashmir is an integral part of India and will always remain so.

Mr. President,

21. As I said at the very beginning, we will be judged by our action and equally by our inaction. What goals have we achieved and what objectives remain unfulfilled? I would like to highlight two such pending tasks of this Assembly.

22. The CCIT was proposed by India in 1996. In 2016, despite the passage of two decades, we are yet to come to a conclusion. As a result, we are unable to develop a norm under which terrorists shall be prosecuted or extradited. Therefore it is my appeal that this General Assembly acts with fresh resolve and urgency to adopt this critical Convention.

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RBI Phase-II Examination for Direct Recruitment of Officers in Grade–B (GEN)-BY – 2016 out

                                           

Result of Phase-II Examination for Direct Recruitment of Officers in Grade–B (GEN)-BY – 2016

                                                      RBI LOGO for result of Grade B 2016

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Roll Numbers of candidates shortlisted for Interview


NOTE: Mark list & category wise cut - off for the above examination and final selection will be displayed on website after completion of the selection process and declaration of final results of the recruitment.
1. The interview call letters to all these shortlisted candidates indicating dates and venue of the interview will be sent separately (in due course) on their registered email address. Candidates are requested to check their mailbox, including spam and junk box.
2. All the shortlisted candidates are advised to take print out of interview call letter through their E-mail ID and bring it (hard copy) on the day of interview alongwith ORIGINAL documents.
3. All these shortlisted candidates are advised to send the photocopy of the documents (one set of copies) in support of their Date of Birth, Academic Qualifications (From Matriculation/ SSC Exam) onwards - Mark sheets of all years/semesters and Passing/ Degree certificates, Caste certificate (if SC/ST/OBC), Disability certificate (if Persons with Disability-PWD).
4. As regards academic qualification, if instead of percentage of marks, Aggregate Grade Points (i.e. CGPA/OGPA/CPI, etc.) are allotted, then the candidate must forward the criteria for conversion as defined by the Board/University/Institute. The conversion criterion must be printed on the mark-sheet or the candidate must obtain a certified copy from competent authority of the Board/University/Institute and forward the same to us. If they fail to do so, then the conversion criteria as mentioned at para 2 (b) of the recruitment advertisement no. 1A/2016-17 will be applied.
5. If the shortlisted candidate has taken any benefit of age relaxation, he/she should submit the relevant certificate.
6. Shortlisted Staff candidates should submit their documents through the HRMD/Staff section of respective Regional Office/COD.
7. All these shortlisted candidates are also requested to take print out of the relevant proforma mentioned below, duly fill up and complete them and send alongwith copy of above mentioned certificates to “The General Manager, Reserve Bank of India Services Board, Reserve Bank of India Building, Third floor, Opposite Mumbai Central Railway Station, Byculla, Mumbai 400008” by Courier/Speed Post so that it reaches the Board office within seven days of the date of declaration of the result on the website.
  1. All Candidates - 5 copies of ATTESTATION FORM (all in original) and 7 copies of BIO DATA with prescribed sized, signed photographs affixed.
  2. OBC candidates - In addition to (i) above, and a copy of latest OBC CASTE CERTIFICATE (issued on or after 01.07.2015) and OBC DECLARATION in original as per the prescribed format.
  3. SC/ST candidates - In addition to (i) above, latest SC-ST CASTE CERTIFICATE as per the prescribed format.
  4. PWD candidates – In addition to (i) [and (ii)/(iii)-if applicable] above, disability certificate in the prescribed format issued by the Competent Authority. The Candidates who have availed the facility of a scribe (other than the Visually Impaired candidates) will have to produce a medical certificate from an authorised Govt. of India/State Govt. Department/Hospital, to the effect that the candidate has physical limitation to write including that of speed. This certificate will be required in addition to his/her disability certificate. The medical certificate about physical limitation to write, including that of speed, should be dated prior to the date of on-line/written exam/test.
Disclaimer: Though utmost care has been taken while preparing the list of successful candidates, the Board reserves the right to rectify inadvertent errors, if any.


This is the link of above result Page

https://opportunities.rbi.org.in/Scripts/bs_viewcontent.aspx?Id=3258


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