Thursday, 24 August 2017

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सुप्रीम फैसला :: सुप्रीम कोर्ट ने निजता के अधिकार को घोसित किया मौलिक अधिकार

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संविधान लागू होने के 67 साल बाद भारत के नागरिकों को निजता का अहम मौलिक अधिकार हासिल हुआ है। सुप्रीम कोर्ट की नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने गुरुवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए निजता को मौलिक अधिकार घोषित कर दिया। कोर्ट ने कहा कि निजता का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का ही हिस्सा है। यह संविधान के भाग तीन में मिले मौलिक अधिकारों में सन्निहित है। इस तरह संविधान पीठ ने एमपी शर्मा और खड़क सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के उन अंशों को खारिज कर दिया है, जिनमें निजता को मौलिक अधिकार नहीं माना गया था। 




अब कोई व्यक्ति या सरकार बिना तर्कसंगत कानूनी आधार के किसी व्यक्ति की निजता में बेवजह दखल नहीं दे सकता। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक आदेश के जरिये निजता को मौलिक अधिकार घोषित करना संविधान संशोधन के समान नहीं माना जाएगा। न ही इसे कोर्ट द्वारा संसद के कार्यक्षेत्र में दखल माना जा सकता है।
 संविधान ने जीवन और स्वतंत्रता को व्यक्ति में सन्निहित माना है, जिसे अलग नहीं किया जा सकता। हालांकि, निजता के अधिकार का दायरा स्वतंत्रता और गरिमा के पहलुओं को देखते हुए भिन्न हो सकता है। निजता मानव गरिमा का मूल तत्व है। इसमें निजी अंतरंगता, परिवार की शुचिता, विवाह, संतानोत्पत्ति, घर और यौन इच्छाएं शामिल हैं।-सुप्रीम कोर्टसुप्रीम कोर्ट ने सरकार के उस नजरिये की पुष्टि की है, जो संसद में आधार बिल पेश करते हुए कही गई थी। अदालत का भी कहना है कि निजता का अधिकार पूर्ण अधिकार नहीं है। 
इस पर तर्कसंगत नियंत्रण लगाए जा सकते हैं। रविशंकर प्रसाद, केंद्रीय कानून मंत्री जानकारी नहीं देने के लिए निजता के अधिकार की आड़ ले सकते हैं?’ यह फैसला आपको मर्जी का मालिक नहीं बनाता है। अगर आपसे कोई अपराध हुआ है, तो आप पुलिस या किसी जांच एजेंसी को जानकारी देने से इन्कार नहीं कर सकते। आप यह भी नहीं कह सकते कि बैंक खाता खोलने के लिए अपनी फोटो और अन्य जानकारी नहीं देंगे। 
निजता का उल्लंघन कैसे होता है?’ आप खुद अपनी निजी जानकारी ऐसी कंपनी या ऐसे व्यक्तियों को देते हैं जो आपकी निजी जानकारी का दुरुपयोग भी कर सकता है। जैसे कि आपने किसी मॉल में स्टोर शॉपिंग कार्ड बनवाया। इसके लिए आप स्टोर को नाम, पता, मोबाइल नंबर, ईमेल आइडी, शादी की सालगिरह के ब्योरे देते हैं। यह शेयर हो सकता है।

क्या इस फैसले के बाद भी सरकार निजी जानकारी ले पाएगी? 1’ हां, इस पर कोई रोक नहीं है। अगर आप संपत्ति खरीद रहे हैं और अपने बारे में जरूरी जानकारी नहीं देना चाहें तो यह नहीं चलेगा।इस तरह मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट निजता के अधिकार का मुद्दा आधार को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान उठा था। याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि बायोमीटिक डाटा लिए जाने से उनकी निजता के अधिकार का हनन होता है। लेकिन, सरकार का कहना था कि निजता कोई मौलिक अधिकार नहीं है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामला नौ जजों के पास भेज दिया। 1954 और 1962 में छह न्यायाधीशों की पीठ ने निजता को मौलिक अधिकार नहीं माना था।

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